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सफलता की कहानियां असफलताओं से भरी हैं – बहाना बर्बादी है

बहाना – ये लेख आपकी जिंदगी बदल सकती है।

दोस्तों, लाइफ में हर बार सफल हों ये जरूरी नहीं, कई बार हमें असफलताओं का भी सामना करना पड़ता है। लेकिन इस बात को हमेशा याद रखिये कि असफलता ही हमारी सफलता तक पहुँचने का Highway है। हम कभी भी किसी सफल व्यक्ति की असफलताओं को नहीं देखते और यही सोचते रहते हैं कि उसने क्या किश्मत पाई है! और इसी वजह से आज वह सफल है। लेकिन हर सफलता के पीछे वर्षों की कड़ी मेहनत शामिल होती है। लोग जब असफल होते हैं या कोशिश नहीं करते, तब वे बहुत सारी Excuses देते हैं, जैसे उनकी किश्मत ही ख़राब थी, उन्हें कुछ करने का मौका नहीं मिला..

Image Credit : pixabay.com

हमारी लाइफ इतनी भी लम्बी नहीं है कि हम बहाना बनाते हुए अपनी जिंदगी गुजार दें। हर व्यक्ति कोई न कोई सपना देखता है और वह चाहता है कि उसका सपना पूरा हो लेकिन बहाना बनाने के कारण ही वह आगे कुछ नहीं कर पाता और निराशा से घिरे हुए ही पूरी जिंदगी गुजार देता है। आप सफल न हो पाने के कारण में हजारों बहाने सामने रख देंगे लेकिन आज मैं आपके सामने ऐसे बहुत से उदाहरण या कहानी शेयर करूँगा जिससे आप बहाने बनाना ही छोड़ देंगे।

मैंने कई बार कोशिश की लेकिन मैं असफल रहा सफल नहीं हुआ

हममे से ज्यादातर लोग किसी काम को शुरू करते हैं और उसमें एक-दो बार या हद से हद चार-पांच बार फेल हो जाते हैं, हमें सफलता नहीं मिलती और बुरी तरह से असफल हो जाते हैं तब हम खुद से कहते हैं, कि अब बस बहुत गया.. अब मेरा कुछ नहीं हो सकता… इतनी कोशिश करने के बाद फेल हो जाना मेरे लिए काफी दुःख की बात है.. अब मैं और कोशिश नहीं कर सकता।

ऐसी बातें करके हम और कोशिश ही नहीं करते…अपनी हार स्वीकार कर लेते हैं और निराश बैठ जाते हैं। क्या आप उस व्यक्ति के बारे में जानते हैं जो 21 साल की उम्र में बिजनेस में बुरी तरह फेल हुआ, एक साल बाद 22 की उम्र जब उसनें चुनाव लड़ा उसमें भी वह हार गया.. दो साल बाद 24 साल की उम्र में उसनें फिर से बिजनेस शुरू की और इस बार फिर से बुरी तरह फेल हुआ। 27 साल की उम्र में वह डिप्रेशन में चला गया। 34 साल की उम्र में वह फिर से चुनाव में खड़ा हुआ और फेल हुआ। 45 साल की उम्र में सीनेट के चुनाव में हारा, दो साल बाद वह उपराष्ट्रपति बनने में असफल रहा। 49 साल की उम्र में उसे सीनेट के चुनाव में फिर से बुरी हार मिली लेकिन वही व्यक्ति 52 साल की उम्र में अमेरिका का राष्ट्रपति चुना गया। आप उन्हें जानते ही होंगे, उनका नाम है अब्राहम लिंकन। उन्होंने कभी भी कोशिश करना नहीं छोड़ा, बार-बार असफल हुए लेकिन सफल होकर ही उन्होंने दम लिया। हम अब्राहम लिंकन को कभी भी असफल नहीं कह सकते, हाँ यदि वे अपनी असफलताओं से घबराकर दुबारा खड़े ही नहीं होते तब आप उन्हें एक असफल व्यक्ति में गिन सकते थे लेकिन उन्होंने अपनी असफलताओं से सीखा, उसे सीढ़ी की तरह इस्तेमाल किया और वे सफल हुए। वे चाहते तो शर्म से सिर झुका सकते थे और फिर से अपनी वकालत शुरू कर सकते थे लेकिन उन्हें अपनी हार स्वीकार करना पसंद नहीं था।

बचपन से ही मुझ पर जिम्मेदारियों का बोझ लदा गया

अकसर लोगों के पास जब कुछ अपनी असफलताओं को छुपाने के लिए मुखौटा चाहिए होता है तब वे कभी न कभी ऐसी बातें भी करते हैं कि बचपन से ही मुझ पर फैमिली का प्रेशर था, इसलिए मैं जिम्मेदारियों में ही उलझकर रह गया और कुछ बड़ा नहीं कर पाया।

हमारे देश की प्रख्यात गायिका जिन्हें आप सब लता मंगेश्कर के नाम से जानते हैं, उन्हें भी अपना पहला गाना, घर की जिम्मेदारियों को उठाने के लिए ही गाना पड़ा था।

 मंदबुद्धि या बेवकूफ समझा जाना

लोगों के द्वारा अक्सर सुनने में आता है कि सब मुझे बेवकूफ कहकर ही चिढ़ाते हैं जिससे मेरा आत्मविश्वास और मनोबल गिर जाता है और इसी वजह से मैं आगे नहीं बढ़ पा रहा। सब मुझे मंदबुद्धि कहकर हँसते हैं।

क्या आप थॉमस एडिसन को जानते हैं! जब वे चार साल के थे तब उन्हें स्कूल से यह कहकर निकाल दिया गया था कि वो इस दुनिया का सबसे बड़ा मंदबुद्धि है और वह कभी आगे नहीं बढ़ पाएगा। वे मुश्किल से तीन महीने ही अपने स्कूल में पढ़े होंगे उसके बाद उनकी माँ ने ही उन्हें पढ़ाया लिखाया और उसी व्यक्ति ने बड़े होकर बिजली के बल्ब का निर्माण किया । कहा जाता है कि बिजली बल्ब के निर्माण से पहले वे 10 हजार बार असफल हुए थे तब जाकर उन्होंने बल्ब का आविष्कार किया। उन्होंने ही कहा था कि वे दस हजार बार फेल नहीं हुए बल्कि वे समझ चुके थे कि इन 10 हजार तरीकों से बल्ब का निर्माण संभव ही नहीं है। वे अपनी असफलताओं से कभी निराश नहीं हुए और न ही उन्होंने कभी बहानों का सहारा लिया । एक मंदबुद्धि समझा जाने वाला बच्चा कल बल्ब का आविष्कार कर सकता है तो आप भी सब कुछ कर सकते हैं।

बचपन में मेरे पिता का देहांत हो गया

बचपन में जब किसी बच्चे के पिता का देहांत हो जाता है तब वह या तो टूट जाता है या फिर सफलताओं के रिकॉर्ड तोड़ने की सोचता है । या तो वह बन जाता है या फिर बहुत बुरी तरह से बिगड़ जाता है। लोगों के मुंह से ऐसी बातें भी सामने आती हैं कि वे इस वजह से कुछ बड़ा नहीं कर पाए या उन्हें इसलिए सफलता नहीं मिली क्योंकि बचपन से ही उसके पिता का साया उससे छीन गया था और अपने पिता के न होने से सब ज़िम्मेदारियाँ उसी के कन्धों पर थीं इसलिए वह कुछ बन नहीं पाया । हमारे देश के सुप्रसिद्ध संगीतकार A.R. रहमान के पिता का देहांत भी उनके बचपन में ही हो गया था लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अपनी लाइफ में कोई  बहाना नहीं बनाया । हाँ वे कई बार फेल भी हुए लेकिन वो जिस मुकाम तक पहुंचना चाहते थे, वहाँ पहुंचकर उन्होंने ये साबित कर दिया कि अगर आप कुछ करना चाहते हैं तो कोई बहाना आपके आगे रुकावट नहीं बन सकता ।

एक्सीडेंट में मैं अपंग हो गया या दुर्बलता के कारण कुछ नहीं कर पाया

वाह ये तो बहुत बढ़िया बहाना है, कि आपके पैर नहीं है इसका मतलब आप भीख मांगेंगे, आपके हाथ नहीं मतलब आप इस बहाने से कुछ करेंगे नहीं.. क्या आप Nick Vujicic को जानते हैं जिनके बचपन से ही हाथ पैर नहीं है । लेकिन उन्होंने कभी भी इसका बहाना नहीं बनाया । वो आज पूरी दुनिया में सेमिनार करते हैं, तैराकी करते हैं, गोल्फ खेलते हैं, हर वो चीज करते हैं जो एक नॉर्मल इंसान करता है। वो सभी के लिए एक जीती जागती मिशाल हैं। आप सुधा चंद्रन जी को जानते ही होंगे जो भारतीय फिल्म जगत की अभिनत्री और एक डांसर हैं.. उन्होंने अपने दोनों पैर खो दिए लेकिन डांस और एक्टिंग नहीं छोड़ी। बहाना का सहारा इन लोगों ने कभी नहीं लिया और इसलिए आज मैं इनकी बातें आपके सामने शेयर कर रहा हूँ।

मैं बहुत गरीब हूँ

गरीबी कभी भी आपके सफलता का रोड़ा नहीं बन सकती। हमारे देश के प्रधानमंत्री भी एक गरीब घर में पैदा हुए, गुजरात के रेलवे स्टेशन पर चाय बेचने से लेकर आज वे देश के प्रधानमन्त्री हैं। डॉ. ए.पी.जे.अब्दुल कलाम साहब को कोई भूल नहीं सकता, लेकिन आप ये क्यों भूल रहे हैं कि रामेश्वरम में वे एक बहुत ही गरीब परिवार में पैदा हुआ थे, अपनी पढाई का खर्च उठाने के लिए वे अख़बार बेचते थे और आगे की कहानी आप जानते ही हैं कि आज वे करोड़ों लोगों के लिए एक प्रेरणास्रोत हैं।

 

दोस्तों यदि आप सफल होने के लिए कदम बढ़ा रहे हैं, तो यकीनन आपके रास्ते में ढेरों मुश्किलें आएंगी, आपको बहुत ठोकरें भी खानी पड़ेंगी लेकिन यदि आप अपनी असफलताओं से सीखते हुए आगे बढ़ते जाएंगे तो यही असफलता आपको आपकी सफलता का रास्ता दिखाते जाएगी, जैसे-जैसे आप आगे बढ़ते जाते हैं, प्रेरणा आपके अन्दर आनी शुरू हो जाती है.. बस आपको रुकना नहीं है, बहाने नहीं बनाना है। क्योंकि जब आप रुक जाते हैं, बहाने बनाना शुरू कर देते हैं तो आप अपने सपने को मारना शुरू कर देते हैं। हर असफलता के बाद खुद से सवाल करें कि आप फेल हुए तो आपने क्या सीखा, आपकी असफलता कभी भी खाली या बर्बाद नहीं जाएगी । यह हमें सिखा रही होती है कि हम अपनी असफलताओं से ही आगे बढ़कर सफलता प्राप्त करते हैं।

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हम इसका अगला भाग जल्दी ही साईट पर प्रकाशित करेंगे ।

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धन्यवाद 🙂

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