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आपके अंदर कितना है Josh ! | Inspirational Article in Hindi

आपके अंदर कितना है Josh ! How is the Josh in Hindi

पिछले साल एक मूवी आई थी जिसमें एक संवाद काफी ज्यादा मशहूर हुआ, ‘हाऊ इस द जोश।’ युवाओं के लिए यह संवाद प्रेरणा स्रोत का काम कर सकता है। काम में नियमित रूप से जुड़े रहने के लिए आंतरिक उत्साह और उल्लास की बहुत आवश्यकता होती है। सवाल यह है कि आखिर ये जोश आता कहाँ से है ? कुछ लोग दिन भर जोश और उसी एनर्जी के साथ काम कैसे करते हैं ! वहीँ कुछ लोग थोड़ा-सा काम करके परेशान हो जाते हैं। यदि जीवन में सफलता की ऊंचाइयों को छूना चाहते हैं, तो आपको खुद को पहचानना होगा और अपने जोश को बनाए रखना होगा। आपको अपनी रूचि को समझना होगा। अगर आप मनपसंद काम करेंगे तो कभी भी नहीं थकेंगे। इस तरह आप अपनी रूचि के अनुसार कड़ी मेहनत करते हुए अपनी मंजिल तक पहुँच जाएंगे। आइये इस लेख में जोश को बरकरार रखने के कुछ तरीकों के बारे में जानते हैं –

अपने काम से प्यार करें

सबसे पहले आपको अपने काम को अच्छी तरह से समझना होगा। जब आप अपने काम को अच्छी तरह से समझ लेते हैं तो फिर मन में उसके प्रति कोई भी डर या भ्रम की स्थिति नहीं रहती है। आपको जो भी काम करना है उससे पूरी तरह से परिचित हो जाएं। जीवन में ऐसा कोई काम न करें, जिसमें आपकी रूचि न हो क्योंकि जिस काम में आपकी रूचि नहीं होती, उसे आप हमेशा अधूरे मन से करते हैं।

हारी बाजी जीत सकते हैं

आपने कई बार गौर किया होगा कि खेल के मैदान पर हर खिलाड़ी वार्मअप करता है। वह मन ही मन जीतने की कल्पना करता है। अगर आप जीवन में सफलता प्राप्त करना चाहते हैं तो जीत के बारे में सोचना शुरू करें। अपने जोश के बदौलत आप हारी हुई बाजी भी जीत सकते हैं। अपनी जोश के बदौलत ही आप अपनी टीम को लक्ष्य पाने के लिए तैयार कर सकते हैं।

जोश से मिलेगी सफलता

आप अपने मन में इस बात को बैठा लें कि अगर जीवन में आगे बढ़ना है तो जोश बहुत काम आता है। बिना जोश के आपके मन में निराशा के भाव पैदा होने लगेंगे और आप आगे नहीं बढ़ पाएंगे। आपको बार-बार विफलता मिलेगी, पर यदि आपके मन में जोश कायम है तो सफलता मिलने तक आप लगे रहेंगे। उस चींटी के बारे में सोचें जो बार-बार गिरने पर भी दीवार पर चढ़कर ही मानती है।

टाइम मैनेजमेंट पर फोकस करें

हर व्यक्ति दिन के किसी न किसी ख़ास समय में ऊर्जावान होता है। कुछ लोग सुबह के समय सबसे मुश्किल कामों को आसानी से पूरा कर लेते हैं, तो कुछ रात के समय में कठिन कार्यों को करना पसंद करते हैं। आपको खुद को समझना होगा और पता लगाना होगा कि आपके अंदर सबसे ज्यादा प्रोडक्टिविटी कब रहती है। उस समय आपको सबसे ज्यादा क्रिएटिव काम करने चाहिए। बाकी समय आपको अपने रूटीन पर काम करने चाहिए। आपको पूरे दिन की प्लानिंग कर लेनी चाहिए। आपके पास हमेशा ‘टू डू लिस्ट’ होनी चाहिए। इससे आपका समय भी ख़राब नहीं होता है।

यह लेख राजस्थान पत्रिका से प्रेरित है।

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