आशंका एक विष है | Article on Doubt in Hindi

आशंका एक विष है।

मनोविज्ञान स्पष्ट रूप से कहता है कि किसी व्यक्ति के अन्दर बीमारी की आशंका बॉडी के उस भाग में तनाव पैदा कर देती है और उस अंग में बीमारी आ जाती है। यदि आप किसी कमजोर व्यक्ति के मन में यह आशंका डाल दें कि उसके अन्दर एक बड़ी बीमारी है, तब वह उस बात को एक्सेप्ट कर लेगा और वह उस बड़ी बीमारी से ग्रसित हो जाएगा। वहम सब रोगों की जड़ है। जब आपके मन में निराशा, आशंका, दुःख, निर्धनता जैसे विचार आते हैं तब उसी क्षण हमारी बॉडी के प्रत्येक भाग में इसका प्रभाव पड़ता है। हम वैसा ही सोचने लगते हैं और हमारे साथ वैसा ही होता है।

जब हम अपने मन को कमजोर कर लेते हैं, तब आशंका हमें घेर लेती है। जब भी कोई आशंका आए उसे तुरंत अपने मन से निकाल दीजिए, उसे पालिए मत। सफलता के बारे में वहम मत पालिए, क्योंकि ये आपके मन को इतना कमजोर कर देंगी कि आप इससे उबरने में असमर्थ हो जाएँगे।

जब भी हम सफलता के बारे में सोचते हैं, मन में एक डाउट होता है कि इतनी मेहनत के बावजूद हम सफल होंगे भी या नहीं! बार-बार Doubts के कारण ही मन कमजोर पड़ने लगता है, और हम Quit करने के बारे में ही सोचने लगते हैं। हमारी आशंकाएं न सिर्फ हमें कमजोर करती हैं बल्कि हमारे कदमों को भी पीछे कर लेती हैं।

आशंकाओं के बारे में किसी भी प्रकार से मत सोचिये, उन्हें भुलाने या भगाने के बारे में भी न सोचिये, बल्कि अपने मन को दुसरे कार्यों में उलझा दीजिए। माइंड को शंकाओं से दूर करने के लिए आप अच्छी किताबों का सहारा ले सकते हैं, पॉजिटिव लोगों से खुद को जोड़ सकते हैं।

सफलता के लिए बहुत जरूरी है कि हम खुद पर भरोसा रखें, पूरे साहस के साथ आगे बढ़ें, शंकाओं को मन में घर करने न दें, हमारी शंकाएं विष के समान हैं, जो हमारे आत्मविश्वास को खत्म कर देती हैं। अपनी सफलता को लेकर Sure रहें, क्योंकि जब आप विश्वास करते हैं तब आप Quit नहीं करते, आप काम करते जाते हैं और अपने विश्वास के दम पर आगे बढ़ते रहने से आप सफल हो जाते हैं।

 

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धन्यवाद 🙂

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