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नमस्कार दोस्तों,
Peter Thiel एक Billionaire Entrepreneur,  Venture Capitalist और Founder हैं, PAYPAL के।
उन्होंने स्टार्टअप बिजनेस के ऊपर stanford university में एक Lecture दिया था, उस Lecture में उन्होंने स्टुडेंट्स को कुछ principles बताए थे जिससे कि वे Students भी उनकी तरह बिलियन डॉलर का बिजनेस बना सकते हैं.
                                                                   

ब्लेकमास्टर नाम के एक स्टूडेंट ने उस Lecture की एक डिटेल नोट्स बना ली थी।  ये नोट्स उनको इतनी काम की लगी कि वो कॉलेज के बाहर भी फैलने लगी।  तब पीटर ने ब्लेकमास्टर के साथ काम करके उस नोट्स को और भी improve किया, और उसकी एक Book भी बना दी, ताकि उनकी City या Country के लोग ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लोग उनकी Knowledge का फायदा उठा पायें.
आज हम HamariSafalta.com के सभी पाठकों के साथ उसी किताब के कुछ Principles share करेंगे जो आपको Startup Business में आगे लाने में Help करेगी।

                 Principle No.1 Go from Zero to One.


एक ऐसे टाइम पर जब गाड़ी के लिए घोड़ों का इस्तेमाल किया जाता था, उस टाइम आप यदि लोगों को और तेज घोड़े लाकर देते या बेहतर घोडा गाड़ी बनाकर बिजनेस करते तो आप जो Progress करते तो उसे बोलते हैं :-  One (1) to N

लेकिन यदि आप लोगों को घोड़ा गाड़ी के बजाये traveling का कोई नया तरीका दे देते, एक कार बनाकर जैसे कि हेनरी फोर्ड ने किया तब उस Progress को कहते हैं Zero (0) to 1

अगर आपको Successful बनना है और अपनी लाइफ में कुछ बड़ा अचीव करना है तो 0 to 1 जाओ जिसे हम Vertical progress भी बोलते हैं.  कुछ ऐसा करने की कोशिश कीजिये जो पहले कभी भी नही हुआ हो!
क्योंकि जो चीज पहले से बनी हुई है और आप उसे ही कॉपी कर रहे हो, वो भी उसमे थोड़े-बहुत changes लगाकर तो आप 1 से N जा रहे हैं, जिसे हम Horizontal Progress भी कहते हैं।  लेकिन ये करने के बाद आपको Success मिलने के Chance बहुत कम हो जाते हैं।  और यदि गलती से आपको थोड़ी सक्सेस मिल भी जायेगी तो वह बहुत बड़ी नहीं होगी और ज्यादा टाइम तक भी नहीं टिकेगी। 
Business world में हर बड़ा Achievement बस एक बार होता है,

दुनिया का अगला बिल गेट्स ऑपरेटिंग सिस्टम नहीं बनाएगा।
अगला मार्क जुकरबर्ग एक सोशल नेटवर्क नहीं  Create करेगा।
और अगला लैरी पेज एक नया सर्च इंजन नहीं बनाएगा।

इन सबको बहुत बड़ी सक्सेस मिली क्योंकि ये सभी  0 से 1 गए, पर अगर आप इन्हें Exactly copy करने का Try करेंगे तो आप बस 1 से N जा पायेंगे जो कि एक बेस्ट ओप्शन बिलकुल भी नहीं है ...


जरूर पढ़ें:- एक Successful Startup Business कैसे बनाएँ?  How to Build a Successful Startup Business in Hindi?  


           Principle No.2 Become a Monopoly  Avoid Competition

हम ऐसे समाज में रहते हैं जहाँ Competitionको बहुत Encourage मिलता है. हमारा एजुकेशन सिस्टम बच्चों को बचपन से ही Compete करना सिखाता है. पहले वो Marks के लिए एक-दूसरे से Compete करते हैं, फिर जॉब के लिए और फिर यदि कोई नहीं मिलता तो अपने पडौसी के साथ ही Compete करने लगते हैं। 
पडौसी से ज्यादा अच्छी कार रखना, उससे बड़ी टी.वी रखना, ये सब स्टुपिड चीजें competition बन जाती हैं.
पर सच तो ये है कि Competition आपको mostly हर चीज के लिए loss ही देगा.
Business में भी Competition जहर जैसा होता है,
Peter बताते हैं कि Competition और Capitalism opposite हैं... एक Profit generate करने से related है और दूसरा profit को खत्म करने से related है..
आपके बिजनेस मार्केट में जितना ज्यादा competition होगा, उतना कम आप profit कमा पायेंगे, फिर चाहे आपका बिजनेस कितना भी बड़ा क्यों न हो!
Example:-
US की Airline company करोड़ों और अरबों में पैसे बनाती है, पर फिर भी 2012 में वो कम्पनी एक पेसेंजर पे बस 37 Cent का Profit कमा पाई थी।    अब आइये इसे compare करते हैं Google से:-
Google ने उसी साल total 50 Billion बनाये थे, जबकि Airlines ने 160 Billion.  लेकिन गूगल ने 50 Billion में 21% का Profit बनाया था. जो कि Airlines की Company के profit से 100 गुना ज्यादा था.
ऐसा इसीलिए हुआ क्योंकि Airlines कम्पनी एक दूसरे से Compete करने के चक्कर में अपने टिकिट के दाम कम कर रही थी.  लेकिन दूसरी तरफ गूगल अकेले ही अपना ज्यादातर अपना मार्केट Dominate का रहा था, बिना किसी से Profit के लिए Compete करे..
आज के टाइम पर यदि हम सारे Airlines company के profit को एक कर दें फिर भी गूगल उनसे तीन गुना ज्यादा का फायदा कमाता है.
गूगल ऐसा कर पाता है क्योंकि गूगल का सर्च इंजन Monopoly है और इस चीज में कोई भी उसका कोई भी बड़ा Competitor नहीं है ..
अगर आपको इंटरनेट में कुछ भी सर्च करने के लिए कहा जाए तो आप बिना सोचे गूगल ही करेंगे.. क्योंकि आपको पता है कि इसके लिए गूगल ही बेस्ट है..
ठीक इसी तरह आपको भी कोई बड़ी सक्सेस चाहिये तो आपको भी Monopoly create करनी चाहिए, आपके प्रोडक्ट या सर्विस की जिसमे आपसे बेटर कोई दूसरा ओप्शन हो ही न लोगों के पास..



   Principle NO. 3 Start with a Niche Market & then Dominate 
Amazon एक ऎसी वेबसाइट है जहाँ A to Z आपको सब सामान मिल जाएगा. पर Amazon ने अपनी शुरुआत ऐसे नहीं की थी .. Start में Amazon ने एक छोटे से मार्केट पर Concentrate किया, वो मार्केट था बुक्स पढ़ने वाले लोगों का..
इससे पहले तक किताबें सिर्फ Book stores पर मिला करती थीं. जिसके बाद बहुत सी बुक्स, बहुत खोजने पर भी लोगों को मिल नहीं पाती थीं. और Book publishers को बहुत loss होता था. उसके बाद Amazon ने एक Online book store बनाकर 0 to 1 Progress लाया. इससे बहुत लोगों का बहुत फायदा हुआ.
Books के बिजनेस में सफल होने के बाद Amazon ने और दूसरे बुक्स से रिलेटेड प्रोडक्ट्स जैसे- सी.डी., डी.वी.डी. बेचना शुरू किया और फिर धीरे-धीरे अपना हर मार्केट को डोमिनेट कर दिया..

हमेशा एक बात याद रखिये कि एक बड़े से तालाब में एक छोटी-सी मछली, जिसे दूसरी बड़ी मछलियाँ कभी भी आराम से खाकर खत्म कर दे वो बनने से बेहतर है कि आप एक छोटे-से तालाब की बड़ी मछली बनो और फिर बड़े तालाब में जाओ ..
जब आप ये सारी बातें याद रखकर Start up करेंगे तो आपके सफल होने के chances बहुत बढ़ जायेंगे ...



दोस्तों यह पूरी आर्टिकल एक बेहतरीन किताब  Zero to One  से प्रेरित है जिसके Author
Peter Thiel   हैं..
उम्मीद करते हैं कि यह आर्टिकल आपको पसंद आया हो और यह भी आशा करते हैं कि इन 3 Principles का Use आप अपनी Real Life में भी करेंगे...औरअपने बिजनेस को आगे लाने में सहायक साबित होंगे



कृपया इसका एनिमेटेड विडियो जरूर देखें ... और इस बेहतरीन  यूट्यूब चैनल को जरूर सबस्क्राइब कीजिये...


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                                          THE 5 LOVE LANGUAGES IN HINDI

नमस्कार दोस्तों,
एक आदमी जो बहुत अमीर था, लेकिन वह फिर भी कभी खुश नहीं दिखता था. ये देखकर एकदिन Author ने उससे पूछ लिया, कि तुम्हारे पास तो Basically सब कुछ है फिर तुम क्यों ऐसे Sad और Tension में दीखते हो?
तब उस आदमी ने कहा- ये लग्जरी कार, बंगलो, पैसे होना क्या फायदे का!  जब मेरी Wife और मेरी Family ही मुझसे प्यार नहीं करती..
इंसान की जो सबसे डोमिनेटिंग इमोशन्स हैं - Love & Fear.. और हमारा Personally मानना है कि Love की Feeling, Fear से ज्यादा Powerful होती है..
प्यार एक कमजोर इंसान को इतना Powerful बना सकता है कि वह अकेला पहाड़ तोड़कर उसमे से रास्ता बना दे..
और दूसरी ओ़र से Healthy अमीर इंसान को इतना कमजोर बना दे कि वह खुद के हाथ से खुद का खाना तक न खा सके..
हर इंसान को अपनी लाइफ में प्यार की बहुत ज्यादा जरूरत होती है.. भले ही आपके पास सब कुछ हो लेकिन आपको कोई प्यार करने वाला नहीं होगा तो यह दुनिया आपको बेकार लगेगी.. और भले ही ये बात हम बोलें या न बोलें लेकिन हम सब अंदर से यह चाहते हैं कि हमें at least हमारे लाइफ के कुछ खास लोगों से बहुत सारा प्यार मिले..जैसे - अपने Parents से अपने बच्चों का प्यार, अपनी लाइफ पार्टनर का प्यार और end में अपने दोस्तों का प्यार...
Author Gary Chapman जो कि Marriage, Family और Relationship expert हैं वो बताते हैं कि हर इंसान के अंदर एक Emotional Love tank होता है, जो किसी और किसी चीज से नहीं बस उन कुछ खास लोगों के प्यार से भरता है .. जब तक वो प्यार उन्हें दिखता और मिलता रहता है तब तक वो Emotionally & Mentally stable रहते हैं. in short वो खुश रहते हैं .. But जब वो प्यार मिलना बंद होने लगता है तब वो Love tank खाली होने लगता है, तब इंसान Emotionally & Mentally unstable होने लगता है, उसे कुछ भी अच्छा नहीं लगता और वो frustrated होने लगता है.. और at the end जब टैंक पूरी तरह से खली हो जाती है तब Relationship में सारी बड़ी प्रोब्लम्स आने शुरू हो जाती हैं.. जैसे- लड़ाई, sadness और बाकी बुरी चीजें जो ज्यादातर प्यार को धीरे-धीरे खत्म कर देती है..और Relationship को भी..
हम सबको खुश रहने के लिए जरूरी है कि वो Emotional love tank थोडा तो हमेशा बना रहे पर Sadly आजकल ज्यादातर लोगों को वो प्यार मिल नहीं पाता जो वो Expect करते हैं.. अब इसका reason ये नहीं है कि वो खास लोग हमसे प्यार नहीं करते बल्कि एक सबसे बड़ा reason ये है कि ज्यादातर लोगों के प्यार की लैंग्वेज हमसे अलग होती है.. जो हमें समझ नहीं आती. और इसीलिए कभी हमें उनका प्यार feel नहीं हो पाता...
Example- हम सबकी एक Primary Mother language होती है जिसे हम अपनी mother tongue भी बोलते हैं ..जो हमें सबसे ज्यादा बोलने और समझने में comfortable लगती है.. हो सकता है कि हमें कोई दूसरी Secondary language भी आती हो जैसे- English, Marathi, Sanskrit पर still हमें सबसे ज्यादा अच्छे से ज्यादा समझ हमारी mother tongue ही आती है..
ठीक इसी तरह हम सबकी प्यार की भी अलग-अलग Primary language होती है. जो हमें सबसे ज्यादा अच्छे से समझ आती है. और यही primary language हमारे emotional tank को बहुत ही अच्छे से full कर सकती है..


प्यार की Total 5 Language होती है और अगर आप चाहते हैं कि आपका, आपकी family और पार्टनर के साथ relationship कभी खराब न हो और बस अच्छा होते जाए तो आपको इन 5 languages का पता होना चाहिए..
आपको पता होना चाहिए कि इन 5 languages में से आपकी वो कौन सी language है जो उनकी Primary language है.. जो उन्हें सबसे अच्छा फील कराती है .. और ये पता करने के बाद आपको उनकी language में ही अपना प्यार उनको एक्सप्रेस करना चाहिए..जिससे उनका वो इमोशनल टैंक भी हमेशा full रहेगा..
So Let's begin...


                             LOVE LANGUAGE NO.1    Words of Affirmation
एक Husband और Wife में बहुत झगडे होते थे, Husband अपने हिसाब से Wife को खुश करने के लिए सब कुछ करता था, वो मेहनत से काम करके wife को पैसे लाकर देता, कभी-कभी घर के काम करके वो अपने wife का हाथ बटा देता था, जिसके लिए उसकी wife हमेशा उसकी respect किया करती थी.. लेकिन इसके बाद भी Wife को यह feel नहीं हो पाता था कि उसका Husband उससे प्यार करता है . इस बात से husband को बहुत चिढ़ होती थी लेकिन यहाँ wife की कहीं गलती नहीं थी..  ये बात सच थी कि Husband सब कुछ करता था पर Problem ये थी कि वो अपनी wife को ये नही बोलता था कि वो उससे कितना प्यार करता है...क्यों पर करता है...
वो उसकी कभी तारीफ़ नहीं करता था, उसे लगता था कि ये सब चीजें फिल्मों में ही अच्छी लगती हैं पर real life में इन सब चीजों की जरूरत नहीं होती...
उसे लगता था कि main प्यार तो बस अपनी family के needs को पूरा करना होता है, जो कि वो हमेशा करता था..
अब ये बात इतनी ही stupid है जितना किसी मलयालम बोलने वाले इंसान को हिंदी में समझाने की कोशिश करना और फिर इस बात से गुस्सा भी होना कि आपके इतना अच्छा हिंदी बोलने के बाद भी वो बात उसे समझ क्यों नहीं आई...
Similarly सच तो ये था कि उसकी wife को प्यार feel करने और समझने के लिए वो बातें ही सबसे important थीं, उसकी wife की primary love language थी Words of Affirmation. पर उसका husband दूसरी ही language में उसका प्यार एक्सप्रेस कर रहा था..

Words of Affirmation मतलब अच्छी चीजें बोलना जो तुम्हारे Partner को build करे. और उसे अच्छा feel कराये.
example: I LOVE YOU बोलना..
क्यों तुम उन्हें इतना प्यार करते हो ये बताना..और उसे हमेशा ये बताते रहना.. बोलकर या लिखकर या कैसे भी करके.,,.
उन्हें Encourage करने वाली बातें बोलना, Compliments देना और उन्हें हर छोटी बड़ी बातों के लिए Appreciate करना..
जिन लोगों की ये Primary love language होती है उन्हें जब भी आप Words of Affirmation बोलेंगे उन्हें बहुत अच्छा feel होगा.. और तभी उन्हें आपका Real प्यार feel हो पायेगा.. पर जब तक आप उन्हें ऎसी सिम्पल सी बातें नहीं बोलते तब उन्हें आपका प्यार feel नहीं हो पायेगा..और न ही उनका love tank भरेगा..



                           LOVE LANGUAGE NO.2    Quality Time.
जिन लोगों की Primary love language ये होती है उन्हें यदि आप बोलोगे कि you look ब्यूटीफुल या बताओगे कि How much you love than.. तब उन्हें अच्छा तो लगेगा पर इससे उनको आपका real प्यार feel नहीं होगा!
बल्कि उन्हें वो प्यार फील होगा जब उनके साथ Quality time spend करोगे. और Quality time spend करने का मतलब यह नहीं कि बस एक ही घर में साथ रहकर कैसे भी करके टाइम स्पेंड कर देना, T.V. देखते-देखते बातें करना या मोबाइल पर लगे रहकर उनकी बातें सुनना. ये सब नही!
बल्कि Quality time means अपना पूरा Undivided Attention बस उनको देना, उनके साथ उस Movement में present होना..  बातें करना और वो चीजें करना जो उनको पसंद हो!
जैसे May be साथ में Cooking या Painting करना ...etc..
जब आप उनके साथ Quality time spend करेंगे तो उन्हें वो love feel होगा और तभी वो खुश रहेंगे...



                           LOVE LANGUAGE NO.3    Receiving Gifts

Gifts मिलना किसको पसंद नहीं है! पर जिन लोगों की Primary love language ये होती है वो आपसे ये Expect भी करते हैं कि आप कभी-कभी at least उन्हें एक Gift तो दो..
Gifts, actual में बहुत स्पेशल होते हैं क्योंकि ये सामने वाले को ये feel कराते हैं कि आप उनके बारे में सोचते हो और वो लेते टाइम भी आप उन्हीं के बारे में सोच रहे थे.. जब भी कभी वो आपका गिफ्ट देखेंगे उन्हें ये याद आएगा कि आपने उन्हें याद किया था जो कि बहुत ही अच्छी फीलिंग होती है उनके लिए..
अब अगर आप ये सोच रहे हो कि मैं कहाँ हमेशा गिफ्ट्स दे सकता हूँ, मेरी तो Financial condition अच्छी नहीं है ... तो पहली बात आपको किसी ने नहीं कहा कि गिफ्ट्स, महंगे होना जरूरी है या ऐसा कुछ...
Actual में लोगों को Love feel कराना आपकी सोच से कहीं सस्ता होता है कुछ चोकलेट, एक गुलाब का फूल या कोई सिम्पल सा कार्ड या कोई छोटी-मोटी गिफ्ट्स आपके पार्टनर का या फैमली मेंबर का पूरा दिन बना सकती है..
और अब यदि आप financial अच्छे हैं तो आप जरूर अच्छे गिफ्ट्स देना चाहिए लेकिन at the end आप ये याद रखें कि Gifts की Value पैसों से तौली नहीं जायेगी.. बल्कि उसके पीछे की फीलिंग्स ही होगी जो लोगों को खुश करेगी..
हमने बहुत बार देखा है कि सस्ते से गिफ्ट्स लोगों के बहुत पास होते हैं जिन्हें वो किसी महँगी गिफ्ट्स से ज्यादा संभाल कर रखते हैं.. और बहुत बार तो गिफ्ट्स का तो materialistic होना भी जरूरी नहीं.. कभी-कभी आपके टाइम और आपके Efforts ही उनके लिए गिफ्ट्स हो सकते हैं..
इसीलिए एक आदत बना लें और अपने उन खास लोगों को Special जिनकी love language ये है उन्हें तो at least छोटे-मोटे गिफ्ट्स देते रहो.. ये आपके Relationship बहुत स्ट्रोंग कर देंगे..



                           LOVE LANGUAGE NO.4    Acts of Service

पहली Language में हमने आपको Husband और wife कि स्टोरी बताई थी उसमें Husband अपनी Wife को उस language में अपना प्यार बताना चाह रहा था वो थी Acts of Service..   जिनकी Primary language ये होती है, वो बस इन बातों से खुश नहीं रहेंगे कि आप उनके लिए गिफ्ट्स लेकर आते हो या उनकी हमेशा तारीफ़ करते हो बल्कि आपको उन्हें आपके लिए real love तब feel होगा जब आप कुछ काम करके उन्हें अच्छा feel कराओगे..
उन्हीं कामों में उनकी हेल्प करोगे, घर की जिम्मेदारी को अच्छे से निभाओगे.. और जरूरत पड़ने पर जिम्मेदारियों को शेयर करोगे..
काम करने से तात्पर्य है जैसे - खाना बनाना, घर को साफ़ रखना, पैसे कमाकर देना, घर की जरूरतों को पूरा करना.. बच्चों की जरूरतों को पूरा करना... etc..

                           LOVE LANGUAGE NO.5    Physical Touch

आजकल हमारी Thinking इतनी खराब हो चुकी है कि Physical touch word सुनते ही ज्यादातर लोगों के मन में कुछ गलत वर्ड्स ही आये होंगे..इसीलिए हम पहले ही क्लियर कर देना चाहेंगे कि Sexual होना ही Physical touch नहीं होता... बल्कि ये एक Pure language है, अपने प्यार को दिखाने के लिए..
एक माँ को जब अपने बच्चों के ऊपर प्यार आता है तो वह अपने बच्चे को सीने से लगा लेती है जो कि एक Physical touch है
जब हम कुछ बुरा feel कर रहे होते हैं और जब कुछ बुरा होता है हमारे साथ तब हम अपने दोस्तों या चाहने वालों को Emotional होकर गले लगा लेते हैं.. Because तब हमें प्यार की जरूरत होती है.. और Physical touch एक बहुत ही स्ट्रोंग तरीका है प्यार Feel करने का...

इसी तरह जिन लोगों की Primary language ये होती है वो चाहते हैं कि आप उन्हें Hug करो, गले लगो, साथ में बैठकर टी.वी. देखना, हाथ पकड़कर घूमना ये सब चीजें भी आपका प्यार show कराएंगी..
कुछ बच्चे जिनकी Primary love language ये होती है उन्हें मारने से पहले पहले सौ बार सोचना चाहिए क्योंकि मारना भी एक Physical touch है..लेकिन एक Negative way में...जो उन्हें मानसिक रूप से बहुत ज्यादा डिस्टर्ब कर सकती है..

इसलिए पता करें कि ऊपर दिए गए 5 Primary Love language में आपके खुद की और अपने चाहने वालों की primary language क्या है और फिर उसी लैंग्वज में उन्हें प्यार फील कराओ.. ताकि उनका Emotional Love Tank भर सके.. कभी-कभी आप इन सब पांच Love language का use कर सकते हैं लेकिन आपको हमेशा सबसे ज्यादा अपने Primary love language का use करना चाहिए क्योंकि वही आपके Relationship को बहुत अच्छा रखेगा..



दोस्तों यह पूरी आर्टिकल एक बेहतरीन किताब  THE 5 LOVE LANGUAGES  से प्रेरित है जिसके Author
Gary D. Chapman हैं..
उम्मीद करते हैं कि यह आर्टिकल आपको पसंद आया हो और यह भी आशा करते हैं कि इन 5 LOVE LANGUAGES का Use आप अपनी Real Life में भी करेंगे...



कृपया इसका एनिमेटेड विडियो जरूर देखें ... और इस बेहतरीन  यूट्यूब चैनल को जरूर सबस्क्राइब कीजिये...


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                                        काम कम, परिणाम ज्यादा 80-20 Principle 

Vilfredo Pareto एक Italian economist थे जो 1897 में इंग्लैण्ड के Wealth Distribution और इनकम के बारे में पढ़ रहे थे।  ये पढते ही उन्हें एक अजीब बात पता चली कि इंग्लैण्ड की ज्यादातर जमीन और पैसे बस थोड़े से ही लोगों के हाथ में थी।  in fact बस 20% लोग ही इंग्लैण्ड की 80% जमीन और पैसे के मालिक थे।
ये बात पता चलने के बाद उन्होंने इस बारे में और रिसर्च की तो उन्हें पता चला कि ये प्रिंसिपल न कि दूसरे देशों और दूसरे टाइम में भी सच थी बल्कि ये बात पैसे को छोड़कर दूसरी चीजों के लिए भी सच थी।
जैसे कि- उनकी खुद की गार्डन में जहाँ पर 80% मटर बस 20% Peapod से निकल रही थी।  तभी ये Principle बना जिसे हम Pareto Principle या 80-20 Principle भी कहते हैं जो कि Scientifically हर चीज में Apply होता है।
Including - Business, Relationship, Study, Health etc..



ये Principle कहता है कि आपके 80% Results जो आपको मिलते हैं वो बस आपके 20% काम की वजह से आते हैं।
ये Principle हमारी Normal सोच से बिलकुल उलटी है। हमें लगता है हम जितने ज्यादा एक्शन लेंगे, हमें उतने रिजल्ट्स मिलेंगे।
लेकिन सच तो यह है कि हमारे थोड़े से ही एक्शन्स ही हमें ज्यादातर सही रिजल्ट्स देते हैं।  ये Principle आने के बाद बहुत से लोगों ने अलग-अलग चीजों पर रिसर्च किया और Almost हर चीज में इस Principle को काम करता पाया।

Example- 20% Road पर 80% Traffic होता है.
                20% कपड़े हम 80% Time पहनते हैं.
                20% जमीन 80 % Food और मिनिरल देती है.
                20% बादल से 80% बारिश होती है.
                20% Authors की Books 80% बिकतीं हैं.
                20% Blogs 80% पढ़े जाते हैं

इसके Numbers थोड़े-बहुत आगे पीछे हो सकता है लेकिन यह Principle हर जगह यही बोलता है कि कम चीजें ज्यादा Output देती है .


                                      80-20 Principle को कैसे Apply कर सकते हैं?

80-20 Principle हमें यह नहीं सिखाता कि हमे काम नहीं करना चाहिए या ऐसा कुछ... बल्कि ये हमें सिखाता है that हमें वो काम करना बंद करना चाहिए या उन पर कम फोकस करना चाहिए जो हमें बहुत कम रिजल्ट्स दे रहा है और वो काम ज्यादा करना चाहिए जो हमें ज्यादा रिजल्ट्स दे रहा है। 

बिजनेस के लिए यदि बात की जाए तो, ये Law पहले बिजनेस रिलेटेड चीजों के लिए ही उपयोग किया जाता था But बाद में फिर ये प्रिंसिपल सब चीजों के लिए Use होने लगा.
Startups में ज्यादातर लोग ये गलती करते हैं कि वे अपनी टाइम, एनर्जी, और पैसे उन चीजों  के लिए ज्यादा Use कर देते हैं जिनमे Staring में ज्यादा इतना काम करने की जरूरत नहीं होती..
जैसे कि - कम्पनी का Logo कैसे होने चाहिए!   वेबसाइट का Design कैसा होना चाहिए!   etc..etc...
 ये सब चीजें जरूरी हैं पर इन सब चीजों से ही लोग Attract होकर आपका Product या Service Use नही करेंगे और न ही इन सब चीजों से आपको Results मिलेंगे ... बल्कि Starting में आपका Main Aim होना चाहिए कि अपने प्रोडक्ट या सर्विस को अच्छे से और अच्छा बनाना ताकि वो लोगों की लाइफ और Easy या अच्छी कर सके. और ये सब करने के बाद आपको मार्केटिंग या दूसरी चीजें करनी चाहिए..और वो भी बस 20% प्लेटफोर्म या चीजों पर ध्यान रखते हुए जहाँ पर आपको Maximum Response मिल रहा है..


कुछ और बातें जो आपको हेमशा याद रखनी चाहिए वो ये है कि
आपके 20% Clients ----- आपके 80% Profit का हिस्सा होंगे..
वैसे
20% Clients  --------  80% Complain करने वाले होंगे...
इसलिए आपको इन 20% लोगों में अच्छा फोकस करना चाहिए... और at the End सब कुछ करने से अच्छा बस उन 20% कामों में फोकस करो जो आपको 80% Results दे रहा है..





                           80-20 Principle For Social Life & Happiness
पहले मुझे लगता था कि मेरे जितना ज्यादा दोस्त रहेंगे मेरे लिए उतना अच्छा होगा और इसीलिए मैं सबसे दोस्ती करता था और सबके साथ Time Spend करने की कोशिश करता था..  बहुत बार उन लोगों के साथ भी जिनके साथ मुझे खास मजा भी नहीं आती थी... But ऐसा करते हुए मुझे Realize हुआ कि ऐसा करके मैं अपना बहुत-सा टाइम Waste कर रहा हूँ और Because of this कि मैं दूसरी चीजें नहीं कर पा रहा जो मुझे करनी चाहिए...जैसे- Books पढ़ना या लिखना... Regular Post डालना..etc...
Actually हमारा दिमाग ऐसे Programmed है जिससे हमें लगता है कि
ज्यादा मतलब बेहतर...  MORE  = BETTER
लेकिन ये सच नही है ..
According to this Principle आपका 80% Happiness और Fulfilment सिर्फ 20% दोस्तों की वजह से आती है।   इसीलिए बहुत सारे ठीक-ठाक दोस्त बनाने और उन सबके साथ टाइम स्पेंड करने से अच्छा है आप बस उन 20% लोगों या दोस्तों के साथ Time Spend करो जो आपको सच में अच्छा Feel कराते हैं...और जिनके साथ टाइम स्पेंड करके आपको भी मजा आती है... ये आपका काफी टाइम बचायेगा, बाकी दूसरी चीजों पर फोकस करने के लिए...





                                         80-20 Principle For Studying
मेरा एक दोस्त था जो सारे दिन और कभी-कभी पूरी रात जागकर पढाई करता था और दूसरी तरफ में एक और दोस्त था जो दिन-रात मिलाकर Around 4-6 घंटे ही पढाई करता था..  But जब रिजल्ट्स आते थे तब मेरे दूसरे दोस्त के Marks पहले दोस्त के बराबर या उससे ज्यादा ही रहते थे, वो समझाता था कि वो ज्यादा पढाई नहीं करता लेकिन मेरा पहला दोस्त इसका यकीन नहीं करता था..लेकिन मुझे पता था कि वो सच बोल रहा है..
मेरा दूसरा दोस्त पहले दोस्त से ज्यादा स्मार्ट नहीं था पर वो अनजाने में ही 80-20 Principle  का Use करता था..

सिर्फ 2 चीजों को लेकर जिससे कम पढ़ने के बावजूद भी उसके अच्छे रिजल्ट्स आते थे-
1. Regarding What to Study?

पहली चीज जिसमे वह 80-20 Principle का Use करता था, वो ये था कि पढ़ना क्या-क्या है?
मेरा पहला दोस्त End-end में सब Questions पढ़ने की कोशिश करता था, जिसकी वजह से सब पढ़ने के बाद भी उसे अच्छे से एक भी Answer अच्छे से याद नही रहता था.. और पेपर में भी वह Answers अच्छे से नहीं लिख पाता था...
जबकि दूसरा दोस्त,  पिछले Question Paper और Teachers से जो Important Questions रहते थे वो पता कर लेता था...फिर उन्हें ही एकदम अच्छे से याद कर लेता था और उसके बाद दूसरे Questions पर फोकस करता था....

2. Regarding The Time of Study...
दूसरी चीज जिसमे वह 80-20 Principle का Use करता था, वो था पढाई के टाइम को लेकर
पहला दोस्त दिन भर रात भर पढ़ने की कोशिश करता था पर क्योंकि इंसान एकसाथ अचानक से किसी एक चीज पर ज्यादा टाइम से फोकस नही रख सकता इसीलिए पढते टाइम उसका भी फोकस दूसरी चीजों पर बार-बार जाता रहता था जिससे कई घंटे पढ़ने के बाद भी उसकी Quality Study नहीं हो पाती थी..
दूसरे दोस्त को पता था कि वो सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक पढ़ पाता है और उसके बाद नहीं!
तो वह उसी टाइम पर अपने पूरे फोकस के साथ वह अच्छे से पढता था बाकी सारी चीजें साइड करके जैसे -मोबाइल/गेम/व्हाट्सएप/फेसबुक आदि...

वो भी काफी बीच में ब्रेक भी लेता था जब उसे लगने लगता था कि उसका फोकस खत्म हो रहा है और फिर कुछ और चीजें करके जैसे घर के बाहर एक Walk लेकर या कुछ और करके जिससे उसे फ्रेश फील हो! वह करके वो फिर पढ़ना स्टार्ट करता था...इन्हीं कुछ चीजों की वजह से उसका रिजल्ट कम पढकर भी दूसरे दोस्त से अच्छे आते थे..


आपका काम है कि आप 20% सच करो अपने हर काम में और उसे ही एकदम अच्छे से करो .. ये करने से आपको आधे टाइम में डबल रिजल्ट्स मिलेंगे और आधा टाइम फ्री भी मिलेगा जिसे आप दूसरी Important चीजों के लिए Use कर सकते हो.. और खुश रह सकते हो!




दोस्तों यह पूरी आर्टिकल एक बेहतरीन किताब THE 80/20 PRINCIPLE से ली गयी है जिसके Author Richard Koch हैं..
उम्मीद करते हैं कि यह आर्टिकल आपको पसंद आया हो और यह भी आशा करते हैं कि इस आर्टिकल के जो भी पोइंट्स आपको पसंद आये हों उसका Use आप अपनी Real Life में भी करेंगे...






                                                                                                                                           Thanks!

Also Read:- एक Successful Startup Business कैसे बनाएँ?  How to Build a Successful Startup Business in Hindi?

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 हमारीसफलता.कॉम के सभी प्यारे पाठकों को


                 भारत के 70 वें 


  स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ 




Happy Independence Day...

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                         Winners जो कुछ ऐसे होते हैं Motivational Article in Hindi

दोस्तों आज इस पोस्ट में हम आपको तीन ऐसे प्रेरक विजेता बताने वाले हैं जिससे आप सब भी Winner शब्द का सही अर्थ जान पायें, यह पोस्ट हमने शिव खेड़ा जी की किताब You Can Win से ली है

1. ओलम्पिक में भाग लेना जीवन की एक बहुत बड़ी घटना मानी जाती है. लारेंस लेमिएक्स (Lawrence Lemieux) ओलम्पिक में नाव की रेस (Race) के दौरान मुसीबत में फंसे अपने एक प्रतियोगी की मदद करने के लिए रूक गए. सारी दुनिया देख रही थी. अपने जीतने की इच्छा से ज्यादा दूसरे के जीवन की रक्षा करने को उन्होंने प्राथमिकता दी.
हांलाकि वे नौका-दौड में नहीं जीते, फिर भी विजेता थे.. सारी दुनिया के राजा और रानियों ने उनका सम्मान किया, क्योंकि उन्होंने ओलम्पिक की भावना को जीवित रखा...



2. रूबेन गोन्जेलिस (Reuben Gonzales) रैकेटबॉल की विश्व चैम्पियनशिप फायनल मैच खेल रहे थे. फाइनल खेल में मैच पॉइंट पर, गोंजेलिस ने एक बहुत अच्छा Shot खेला.. रैफरी और लाइन्समैन, दोनों ने उनके शोट को सही बताया और उन्हें विजेता घोषित कर दिया.. मगर गोंजेलिस ने थोडा रुकने और हिचकने के बाद, पीछे मुड़कर अपने प्रतिद्वंदी से हाथ मिलाते हुए कहा, "शोट गलत था " नतीजा यह हुआ कि वे सर्विस हार गए और मैच भी...
हर कोई हैरान रह गया.. कौन सोच सकता था कि एक खिलाडी, जिसके हक में सारी बातें हों, हार को इस तरह गले लगा लेगा... जब पूछा गया कि उन्होंने ऐसा क्यों किया तो गोंजेलिस ने जवाब दिया, "अपने जमीर को बनाये रखने के लिए मेरे पास यही एक रास्ता था.."
वह मैच हार गए, लेकिन फिर भी एक विजेता थे...



3. कुछ सेल्समैनों के एक ग्रुप ने मीटिंग के लिए शहर से बाहर जाते समय अपने परिवार वालों से कहा कि वे शुक्रवार की रात को खाने के समय तक आ जायेंगे. लेकिन जैसा कि इस तरह के दौरों में होता है, एक के बाद एक काम होने की वजह से मीटिंग निश्चित समय पर खत्म नही हो सकी.
उन्हें देर हो चुकी थी, और उन्हें जहाज पकडना था.. वे भागते-भागते जहाज छूटने से कुछ ही मिनट पहले एयरपोर्ट पहुंचे, टिकिट उनके हाथों में था और वे आशा कर रहे थे कि जहाज शायद अभी न उड़ा हो!
इसी भाग-दौड में उनमे से एक मेज से टकरा गया, जिस पर फलों का एक टोकरा रखा था.. सारे फल इधर-उधर बिखर गए और खराब हो गए, लेकिन उनके पास रूकने का समय नही था.. वे दौड़ते रहे और जहाज के अंदर पहुंचकर उन्होंने चैन की सांस ली, सिर्फ एक को छोड़कर...
उसने अपने सथियों से विदा ली और लौट आया.. उसने जो कुछ देखा, उससे उसे अहसास हुआ कि उसने बाहर आकर ठीक किया है..  वह उस गिरी हुई मेज के पास गया, और उसने उस मेज के पीछे एक दस साल की अंधी बच्ची को देखा, जो अपनी रोजी-रोटी के लिए फल बेचती थी..
उसने कहा, " मुझे उम्मीद है कि हमने तुम्हारा दिन खराब नहीं किया है." उसने 10 डॉलर जेब से निकालकर उस लड़की को दे दिए, और कहा, "यह तुम्हारा नुकसान पूरा कर देगा."
इसके बाद वह चला गया.. लड़की यह सब कुछ तो देख न सकी; लेकिन दूर जाते कदमों की धीमी पड़ती आवाज को सुनकर उसने जोर से आवाज लगाई, "क्या आप भगवान हैं?"
उस सेल्समैन का जहाज तो छूट गया, लेकिन क्या वह विजेता नहीं था? यकीनन था...

कोई बिना मेडल के भी विजेता हो सकता है.. और यदि जीत को सही नजरिये से न देखा जाए, तो वह मेडल जीतने के बाद भी हारा हुआ हो सकता है...

                                                                                                                         धन्यवाद!






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