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                                        काम कम, परिणाम ज्यादा 80-20 Principle 

Vilfredo Pareto एक Italian economist थे जो 1897 में इंग्लैण्ड के Wealth Distribution और इनकम के बारे में पढ़ रहे थे।  ये पढते ही उन्हें एक अजीब बात पता चली कि इंग्लैण्ड की ज्यादातर जमीन और पैसे बस थोड़े से ही लोगों के हाथ में थी।  in fact बस 20% लोग ही इंग्लैण्ड की 80% जमीन और पैसे के मालिक थे।
ये बात पता चलने के बाद उन्होंने इस बारे में और रिसर्च की तो उन्हें पता चला कि ये प्रिंसिपल न कि दूसरे देशों और दूसरे टाइम में भी सच थी बल्कि ये बात पैसे को छोड़कर दूसरी चीजों के लिए भी सच थी।
जैसे कि- उनकी खुद की गार्डन में जहाँ पर 80% मटर बस 20% Peapod से निकल रही थी।  तभी ये Principle बना जिसे हम Pareto Principle या 80-20 Principle भी कहते हैं जो कि Scientifically हर चीज में Apply होता है।
Including - Business, Relationship, Study, Health etc..



ये Principle कहता है कि आपके 80% Results जो आपको मिलते हैं वो बस आपके 20% काम की वजह से आते हैं।
ये Principle हमारी Normal सोच से बिलकुल उलटी है। हमें लगता है हम जितने ज्यादा एक्शन लेंगे, हमें उतने रिजल्ट्स मिलेंगे।
लेकिन सच तो यह है कि हमारे थोड़े से ही एक्शन्स ही हमें ज्यादातर सही रिजल्ट्स देते हैं।  ये Principle आने के बाद बहुत से लोगों ने अलग-अलग चीजों पर रिसर्च किया और Almost हर चीज में इस Principle को काम करता पाया।

Example- 20% Road पर 80% Traffic होता है.
                20% कपड़े हम 80% Time पहनते हैं.
                20% जमीन 80 % Food और मिनिरल देती है.
                20% बादल से 80% बारिश होती है.
                20% Authors की Books 80% बिकतीं हैं.
                20% Blogs 80% पढ़े जाते हैं

इसके Numbers थोड़े-बहुत आगे पीछे हो सकता है लेकिन यह Principle हर जगह यही बोलता है कि कम चीजें ज्यादा Output देती है .


                                      80-20 Principle को कैसे Apply कर सकते हैं?

80-20 Principle हमें यह नहीं सिखाता कि हमे काम नहीं करना चाहिए या ऐसा कुछ... बल्कि ये हमें सिखाता है that हमें वो काम करना बंद करना चाहिए या उन पर कम फोकस करना चाहिए जो हमें बहुत कम रिजल्ट्स दे रहा है और वो काम ज्यादा करना चाहिए जो हमें ज्यादा रिजल्ट्स दे रहा है। 

बिजनेस के लिए यदि बात की जाए तो, ये Law पहले बिजनेस रिलेटेड चीजों के लिए ही उपयोग किया जाता था But बाद में फिर ये प्रिंसिपल सब चीजों के लिए Use होने लगा.
Startups में ज्यादातर लोग ये गलती करते हैं कि वे अपनी टाइम, एनर्जी, और पैसे उन चीजों  के लिए ज्यादा Use कर देते हैं जिनमे Staring में ज्यादा इतना काम करने की जरूरत नहीं होती..
जैसे कि - कम्पनी का Logo कैसे होने चाहिए!   वेबसाइट का Design कैसा होना चाहिए!   etc..etc...
 ये सब चीजें जरूरी हैं पर इन सब चीजों से ही लोग Attract होकर आपका Product या Service Use नही करेंगे और न ही इन सब चीजों से आपको Results मिलेंगे ... बल्कि Starting में आपका Main Aim होना चाहिए कि अपने प्रोडक्ट या सर्विस को अच्छे से और अच्छा बनाना ताकि वो लोगों की लाइफ और Easy या अच्छी कर सके. और ये सब करने के बाद आपको मार्केटिंग या दूसरी चीजें करनी चाहिए..और वो भी बस 20% प्लेटफोर्म या चीजों पर ध्यान रखते हुए जहाँ पर आपको Maximum Response मिल रहा है..


कुछ और बातें जो आपको हेमशा याद रखनी चाहिए वो ये है कि
आपके 20% Clients ----- आपके 80% Profit का हिस्सा होंगे..
वैसे
20% Clients  --------  80% Complain करने वाले होंगे...
इसलिए आपको इन 20% लोगों में अच्छा फोकस करना चाहिए... और at the End सब कुछ करने से अच्छा बस उन 20% कामों में फोकस करो जो आपको 80% Results दे रहा है..





                           80-20 Principle For Social Life & Happiness
पहले मुझे लगता था कि मेरे जितना ज्यादा दोस्त रहेंगे मेरे लिए उतना अच्छा होगा और इसीलिए मैं सबसे दोस्ती करता था और सबके साथ Time Spend करने की कोशिश करता था..  बहुत बार उन लोगों के साथ भी जिनके साथ मुझे खास मजा भी नहीं आती थी... But ऐसा करते हुए मुझे Realize हुआ कि ऐसा करके मैं अपना बहुत-सा टाइम Waste कर रहा हूँ और Because of this कि मैं दूसरी चीजें नहीं कर पा रहा जो मुझे करनी चाहिए...जैसे- Books पढ़ना या लिखना... Regular Post डालना..etc...
Actually हमारा दिमाग ऐसे Programmed है जिससे हमें लगता है कि
ज्यादा मतलब बेहतर...  MORE  = BETTER
लेकिन ये सच नही है ..
According to this Principle आपका 80% Happiness और Fulfilment सिर्फ 20% दोस्तों की वजह से आती है।   इसीलिए बहुत सारे ठीक-ठाक दोस्त बनाने और उन सबके साथ टाइम स्पेंड करने से अच्छा है आप बस उन 20% लोगों या दोस्तों के साथ Time Spend करो जो आपको सच में अच्छा Feel कराते हैं...और जिनके साथ टाइम स्पेंड करके आपको भी मजा आती है... ये आपका काफी टाइम बचायेगा, बाकी दूसरी चीजों पर फोकस करने के लिए...





                                         80-20 Principle For Studying
मेरा एक दोस्त था जो सारे दिन और कभी-कभी पूरी रात जागकर पढाई करता था और दूसरी तरफ में एक और दोस्त था जो दिन-रात मिलाकर Around 4-6 घंटे ही पढाई करता था..  But जब रिजल्ट्स आते थे तब मेरे दूसरे दोस्त के Marks पहले दोस्त के बराबर या उससे ज्यादा ही रहते थे, वो समझाता था कि वो ज्यादा पढाई नहीं करता लेकिन मेरा पहला दोस्त इसका यकीन नहीं करता था..लेकिन मुझे पता था कि वो सच बोल रहा है..
मेरा दूसरा दोस्त पहले दोस्त से ज्यादा स्मार्ट नहीं था पर वो अनजाने में ही 80-20 Principle  का Use करता था..

सिर्फ 2 चीजों को लेकर जिससे कम पढ़ने के बावजूद भी उसके अच्छे रिजल्ट्स आते थे-
1. Regarding What to Study?

पहली चीज जिसमे वह 80-20 Principle का Use करता था, वो ये था कि पढ़ना क्या-क्या है?
मेरा पहला दोस्त End-end में सब Questions पढ़ने की कोशिश करता था, जिसकी वजह से सब पढ़ने के बाद भी उसे अच्छे से एक भी Answer अच्छे से याद नही रहता था.. और पेपर में भी वह Answers अच्छे से नहीं लिख पाता था...
जबकि दूसरा दोस्त,  पिछले Question Paper और Teachers से जो Important Questions रहते थे वो पता कर लेता था...फिर उन्हें ही एकदम अच्छे से याद कर लेता था और उसके बाद दूसरे Questions पर फोकस करता था....

2. Regarding The Time of Study...
दूसरी चीज जिसमे वह 80-20 Principle का Use करता था, वो था पढाई के टाइम को लेकर
पहला दोस्त दिन भर रात भर पढ़ने की कोशिश करता था पर क्योंकि इंसान एकसाथ अचानक से किसी एक चीज पर ज्यादा टाइम से फोकस नही रख सकता इसीलिए पढते टाइम उसका भी फोकस दूसरी चीजों पर बार-बार जाता रहता था जिससे कई घंटे पढ़ने के बाद भी उसकी Quality Study नहीं हो पाती थी..
दूसरे दोस्त को पता था कि वो सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक पढ़ पाता है और उसके बाद नहीं!
तो वह उसी टाइम पर अपने पूरे फोकस के साथ वह अच्छे से पढता था बाकी सारी चीजें साइड करके जैसे -मोबाइल/गेम/व्हाट्सएप/फेसबुक आदि...

वो भी काफी बीच में ब्रेक भी लेता था जब उसे लगने लगता था कि उसका फोकस खत्म हो रहा है और फिर कुछ और चीजें करके जैसे घर के बाहर एक Walk लेकर या कुछ और करके जिससे उसे फ्रेश फील हो! वह करके वो फिर पढ़ना स्टार्ट करता था...इन्हीं कुछ चीजों की वजह से उसका रिजल्ट कम पढकर भी दूसरे दोस्त से अच्छे आते थे..


आपका काम है कि आप 20% सच करो अपने हर काम में और उसे ही एकदम अच्छे से करो .. ये करने से आपको आधे टाइम में डबल रिजल्ट्स मिलेंगे और आधा टाइम फ्री भी मिलेगा जिसे आप दूसरी Important चीजों के लिए Use कर सकते हो.. और खुश रह सकते हो!




दोस्तों यह पूरी आर्टिकल एक बेहतरीन किताब THE 80/20 PRINCIPLE से ली गयी है जिसके Author Richard Koch हैं..
उम्मीद करते हैं कि यह आर्टिकल आपको पसंद आया हो और यह भी आशा करते हैं कि इस आर्टिकल के जो भी पोइंट्स आपको पसंद आये हों उसका Use आप अपनी Real Life में भी करेंगे...






                                                                                                                                           Thanks!

Also Read:- एक Successful Startup Business कैसे बनाएँ?  How to Build a Successful Startup Business in Hindi?

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 हमारीसफलता.कॉम के सभी प्यारे पाठकों को


                 भारत के 70 वें 


  स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ 




Happy Independence Day...

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                         Winners जो कुछ ऐसे होते हैं Motivational Article in Hindi

दोस्तों आज इस पोस्ट में हम आपको तीन ऐसे प्रेरक विजेता बताने वाले हैं जिससे आप सब भी Winner शब्द का सही अर्थ जान पायें, यह पोस्ट हमने शिव खेड़ा जी की किताब You Can Win से ली है

1. ओलम्पिक में भाग लेना जीवन की एक बहुत बड़ी घटना मानी जाती है. लारेंस लेमिएक्स (Lawrence Lemieux) ओलम्पिक में नाव की रेस (Race) के दौरान मुसीबत में फंसे अपने एक प्रतियोगी की मदद करने के लिए रूक गए. सारी दुनिया देख रही थी. अपने जीतने की इच्छा से ज्यादा दूसरे के जीवन की रक्षा करने को उन्होंने प्राथमिकता दी.
हांलाकि वे नौका-दौड में नहीं जीते, फिर भी विजेता थे.. सारी दुनिया के राजा और रानियों ने उनका सम्मान किया, क्योंकि उन्होंने ओलम्पिक की भावना को जीवित रखा...



2. रूबेन गोन्जेलिस (Reuben Gonzales) रैकेटबॉल की विश्व चैम्पियनशिप फायनल मैच खेल रहे थे. फाइनल खेल में मैच पॉइंट पर, गोंजेलिस ने एक बहुत अच्छा Shot खेला.. रैफरी और लाइन्समैन, दोनों ने उनके शोट को सही बताया और उन्हें विजेता घोषित कर दिया.. मगर गोंजेलिस ने थोडा रुकने और हिचकने के बाद, पीछे मुड़कर अपने प्रतिद्वंदी से हाथ मिलाते हुए कहा, "शोट गलत था " नतीजा यह हुआ कि वे सर्विस हार गए और मैच भी...
हर कोई हैरान रह गया.. कौन सोच सकता था कि एक खिलाडी, जिसके हक में सारी बातें हों, हार को इस तरह गले लगा लेगा... जब पूछा गया कि उन्होंने ऐसा क्यों किया तो गोंजेलिस ने जवाब दिया, "अपने जमीर को बनाये रखने के लिए मेरे पास यही एक रास्ता था.."
वह मैच हार गए, लेकिन फिर भी एक विजेता थे...



3. कुछ सेल्समैनों के एक ग्रुप ने मीटिंग के लिए शहर से बाहर जाते समय अपने परिवार वालों से कहा कि वे शुक्रवार की रात को खाने के समय तक आ जायेंगे. लेकिन जैसा कि इस तरह के दौरों में होता है, एक के बाद एक काम होने की वजह से मीटिंग निश्चित समय पर खत्म नही हो सकी.
उन्हें देर हो चुकी थी, और उन्हें जहाज पकडना था.. वे भागते-भागते जहाज छूटने से कुछ ही मिनट पहले एयरपोर्ट पहुंचे, टिकिट उनके हाथों में था और वे आशा कर रहे थे कि जहाज शायद अभी न उड़ा हो!
इसी भाग-दौड में उनमे से एक मेज से टकरा गया, जिस पर फलों का एक टोकरा रखा था.. सारे फल इधर-उधर बिखर गए और खराब हो गए, लेकिन उनके पास रूकने का समय नही था.. वे दौड़ते रहे और जहाज के अंदर पहुंचकर उन्होंने चैन की सांस ली, सिर्फ एक को छोड़कर...
उसने अपने सथियों से विदा ली और लौट आया.. उसने जो कुछ देखा, उससे उसे अहसास हुआ कि उसने बाहर आकर ठीक किया है..  वह उस गिरी हुई मेज के पास गया, और उसने उस मेज के पीछे एक दस साल की अंधी बच्ची को देखा, जो अपनी रोजी-रोटी के लिए फल बेचती थी..
उसने कहा, " मुझे उम्मीद है कि हमने तुम्हारा दिन खराब नहीं किया है." उसने 10 डॉलर जेब से निकालकर उस लड़की को दे दिए, और कहा, "यह तुम्हारा नुकसान पूरा कर देगा."
इसके बाद वह चला गया.. लड़की यह सब कुछ तो देख न सकी; लेकिन दूर जाते कदमों की धीमी पड़ती आवाज को सुनकर उसने जोर से आवाज लगाई, "क्या आप भगवान हैं?"
उस सेल्समैन का जहाज तो छूट गया, लेकिन क्या वह विजेता नहीं था? यकीनन था...

कोई बिना मेडल के भी विजेता हो सकता है.. और यदि जीत को सही नजरिये से न देखा जाए, तो वह मेडल जीतने के बाद भी हारा हुआ हो सकता है...

                                                                                                                         धन्यवाद!






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एक लड़का फूटबाल खेलने की प्रैक्टिस करने लगातार आता था, लेकिन वह कभी भी टीम में शामिल नहीं हो सका।  जब वह प्रैक्टिस करता था, तो उसके पिता मैदान के किनारे बैठ कर उसका इंतजार करते रहते थे।
मैच शुरू हुए तो वह लड़का चार दिन तक प्रैक्टिस करने नहीं आया। 
वह क्वार्टर फायनल और सेमी फायनल मैचों के दौरान भी नहीं दिखा।  लेकिन वह लड़का फायनल मैच के दिन आया और उसने कोच के पास जाकर कहा, आपने मुझे हमेशा रिजर्व खिलाडियों में रखा और  कभी टीम में खेलने नही दिया लेकिन कृपा करके आज मुझे खेलने दें। 
कोच ने कहा, बेटा! मुझे दुःख है कि तुम्हें यह मौका नहीं दे सकता।  टीम में तुमसे अच्छे खिलाडी मौजूद हैं।  इसके अलावा यह फायनल मैच है।  स्कूल की इज्जत दाव पर लगी है, मैं तुम्हें मौका देकर खतरा मोल नहीं ले सकता।
लड़के ने मिन्नत करते हुए कहा, सर मैं आपसे वादा करता हूँ कि मैं आपके विश्वास को नहीं तोडूंगा, मेरी आपसे विनती है कि मुझे खेलने दें।
कोच ने इससे पहले लड़के को कभी इस तरह विनती करते हुए नहीं देखा था।  उसने कहा, ठीक है बेटे जाओ, खेलो। लेकिन याद रखना कि मैंने यह निर्णय अपने ही बेहतर फैसले के खिलाफ लिया है और स्कूल की इज्जत दाव पर लगी है, मुझे शर्मिंदा न होना पड़े।
खेल शुरू हुआ और लड़का तूफ़ान की तरह खेला, उसे जब भी गेंद मिली उसने गोल मार दिया।  कहना न होगा कि वह उस मैच का हीरो बन गया।  उसकी टीम को शानदार जीत मिली।
खेल खत्म होने के बाद कोच ने उस लड़के के पास जाकर कहा, बेटा, मैं इतना गलत कैसे हो सकता हूँ?
मैंने तुम्हें पहले इस तरह कभी खेलते हुए नहीं देखा! यह चमत्कार कैसे हुआ? तुम इतना अच्छा कैसे खेल गए?
लड़के ने जवाब दिया, कोच आज मेरे पिताजी मुझे खेलते हुए देख रहे थे !
कोच ने मुड़कर उस जगह को देखा जहाँ उसके पिताजी बैठा करते थे।  लेकिन वहाँ पर कोई नहीं बैठा था।
उसने पूछा - बेटा! तुम जब भी प्रैक्टिस करने आते थे, तो तुम्हारे पिताजी वहाँ बैठा करते थे।  लेकिन आज मैं वहाँ पर किसी को नहीं देख रहा हूँ।
लड़के ने उत्तर दिया - "कोच मैंने आपको यह कभी नहीं बताया कि मेरे पिताजी अंधे थे।  चार दिन पहले उनकी मृत्यु हो गयी।  आज पहली बार वह मुझे ऊपर से देख रहे हैं।"



यह Short Motivational Hindi Story "You Can Win" के हिंदी Translation Book जीत आपकी से प्रेरित है जिसके लेखक शिव खेड़ा जी हैं। 

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                                      -----पढ़ें एक से बढ़कर एक प्रेरणादायक हिंदी कहानियाँ----
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नमस्कार दोस्तों,
हम कितने भी Motivational Videos देख लें या Motivational Articles पढ़ लें, हमारा Motivational या excitement level एक टाइम आने के बाद खतम हो ही जाता है. और end में हम सब कुछ वैसी ही करने लगते हैं जैसा normally हमारी हमेशा की आदत होती है. लोग ज्यादातर अपनी आदतों से मजबूर होते हैं और अपने हिसाब से ही काम करते हैं चाहे कोई कितना भी समझा ले. Actually इंसान बने ही ऐसे हैं कि हमारे लिए हमारी आदतों को बदलना बहुत मुश्किल होता है. पर ये याद रखें आपकी सही आदत ही आपके SUCCESS and FAILURE के बीच का सबसे Important factor बनेगी. So सबसे पहले हमें ये पता होना चाहिए कि कौन-सी Habits हमें अपने अंदर develop या change करनी चाहिए.
आज हम आपको इस पोस्ट में सात ऐसी habits बताएंगे जो आपको Effective बनाएगी.
तो चलिए शुरू करते हैं:-


HABIT 1. BE PROACTIVE
एक Restaurant में एक महिला के ऊपर एक कॉकरोच आकार बैठ जाता है. वो एकदम डर जाती है, पैनिक होकर चिल्लाने लगती है. और उछल-उछलकर अपने दोनों हाथों से उसे दूर फेंक देने की कोशिश करती है.
इतने में हाथ लगने से वो कॉकरोच एक दूसरी महिला पर गिर जाता है. और वो भी पैनिक होकर Same उस पहली वाली महिला की तरह बिहेव करने लगती है. जिससे पास में खड़ा वेटर उनकी मदद करने जाता है .. इधर-उधर फेंकने में अब कॉकरोच वेटर पर आकर बैठ जाता है. but वेटर चिल्लाने और पैनिक होने की बजाये सीधा खड़ा होता है .. कॉकरोच के अपने शर्ट पर चलने को अच्छे से observe करता है और जब उसे confidence feel होता है तब वो फ़ौरन उसे अपनी उंगली से पकड़ लेता है. और restaurant के बाहर फेंक देता है. 
ये स्टोरी को हम author के Proactive और Reactive के Concept से relate कर सकते हैं. 
यहाँ वेटर एक PROACTIVE इंसान था जिसने उन महिलाओं की तरह Situation पर react करने की बजाए सोचकर solution निकाला और उसके According proper action लिया.
Reactive & Proactive होने में बहुत अंतर है ....
Reactive लोग हर चीज में दूसरों को Blame करते हैं. 
जैसे:-
उनका देश तरक्की नहीं कर रहा क्योंकि सरकार अच्छी नहीं है!
वो तरक्की नहीं कर रहे क्योंकि उनका बॉस अच्छा नहीं है.
वो खुश नहीं हैं क्योंकि लोग अच्छे नहीं  हैं.
और अंत में अगर कुछ न मिले तो वो अपनी किश्मत को ही Blame करने लगते हैं.
उन्हें लगता है चीजें कंट्रोल करना उनके हाथ में नहीं है... सब हालत और किश्मत का खेल है. ... पर Actually में उनकी सोच ही सबसे बड़ी main problem है. 
वो usually ऐसे sentences use करते हैं:- 
जैसे--  मैं कुछ नहीं कर सकता!
क्या करूँ मैं बचपन से ही ऐसा हूँ!
वो मुझे बहुत गुस्सा दिलाता है!

जबकि PROACTIVE लोग अपनी फीलिंग्स का कंट्रोल दूसरों को देने के बजाये खुद सँभालते हैं.
वो अपने हर एक Action की जिम्मेदारी खुद लेते हैं.  हालात और किश्मत को ब्लेम करने की बजाये वो Situation को वो किस तरह से better करते हैं इस बारे में सोचते हैं. और Action लेकर उसे सही भी करते हैं. 
आप हमेशा उन चीजों पर फोकस कीजिये जिन्हें आप चेंज कर सकते हैं. न कि उन चीजों पर आप चेंज नहीं कर सकते.



HABIT 2, BEGIN WITH THE END IN MIND 
Imagine कीजिये कि आप funeral  (अंतिम संस्कार) में गए हैं लेकिन ये बाकी funeral  से अलग है because जब आप देखते हैं तो पता चलता है कि काफिन में आपकी बॉडी है और वो आपके खुद के  funeral है. उस टाइम आप अपने आप के लिए क्या-क्या बोलना चाहेंगे. ये एक बहुत ही impactful question है. क्या आप वो सारी चीजें अभी कर रहे हैं जो आप अपने आपको देखकर तब बोलना पसंद करेंगे. 
Example- अगर आप चाहते हैं कि आप बोल सकें कि मैं एक बहुत ही अच्छा दोस्त था तो क्या अभी आप एक बहुत ही अच्छा दोस्त जैसा व्यवहार कर रहे हो!
यदि आप ऐसे इंसान की तरह याद रहना चाहते हैं जिसने लाइफ में बहुत कुछ अचीव किया और सबकी बहुत मदद की तो क्या आप अभी कुछ ऐसा कर रहे हैं जिससे आप Surely ऐसा कुछ कह सकोगे ..
हम चाहते हैं कि आप ऐसा कुछ पूछें कि वो क्या चीजें हैं जो आपको मरने से पहले कैसे भी अचीव करनी ही है both personally or professionally ... और फिर जितना जल्दी हो सके उसके लिए काम करना स्टार्ट कर दें. 




HABIT.3 PUT FIRST THING FIRST
हमें जो काम जरूरी है वो काम सबसे पहले करना चाहिए .. अब ये आदत बोलने में बहुत सिम्पल है पर सबसे मुश्किल भी यही है.
Mostly हमें जितना लगता है हम उतने बीजी होते नहीं!  ऐसा कितनी बार होता है कि हम बेवजह अपने Whatsapp msg चेक करते हैं, Youtube पर वीडियो या फिर टी.वी देखकर टाइम पास करने लगते हैं.  और कुछ नहीं तो बेवजह की बातें सोचने लगते हैं. जबकि हमे कई जरूरी काम खतम करने बाकि होते हैं.  ये सबसे common  आदतों में से एक है जो हमसे हमारी बहुत सी टाइम वेस्ट करती है. और हमें कभी एक एवरेज इंसान से ऊपर उठने नहीं देती. 
so अगर आपको अपनी लाइफ में कुछ करना है तो हर रोज वो काम सबसे पहले खत्म करो जो आपको आपके गोल्स तक पहुँचने में हेल्प करेगा. उसके बाद दूसरे बचे काम को महत्व दो...



HABIT 4. THINK WIN WIN
मान लीजिए hamarisafalta.com की तरह एक दूसरी कोई मोटिवेशनल वेबसाइट है और दोनों वेबसाइट पर हजारों रीडर्स रेगुलर विजिट करते हैं.  अब यदि मुझे आपकी वेबसाइट के बारे में पता चलता है और मैं आपके आर्टिकल्स पढता हूँ, मुझे आपके आर्टिकल्स पसंद आते हैं so मैं आपको मेरी वेबसाइट को पढ़ने के लिए इनवाईट करता हूँ. 
और अपने रीडर्स को आपकी वेबसाइट के बारे में बताता हूँ जिससे मेरे रीडर्स आपकी साईट के भी रीडर्स बन जाते हैं. और इसी तरह आप भी मुझे आपकी वेबसाइट के लिए इनवाईट करते हो और आपके रीडर्स भी मेरे साईट के रीडर्स बन जाते हैं. ... इसे कहा जाता है एक WIN WIN Situation create करना. जिसमे दोनों साइड का फायदा निकले न कि बस किसी एक का.
अच्छा यदि मैं  आपसे Jealous होकर कि आप मेरे Competitor हो, एक गलत नाम से आपकी साईट पर बुरे-बुरे कमेन्ट करता, ये सोचकर कि इससे आपका कुछ नुकसांन होगा और indirectly मेरा कुछ फायदा होगा... तो क्या आपको लगता है कि मेरा सच में कुछ फायदा होता... Obviously ऐसा नहीं होता.  because मैं यहाँ एक WIN-LOOSE Situation create करने का try कर रहा होता जिससे hardly किसी long term के लिए अच्छा हो सकता है.
Actually हमारी मानसिकता ही कुछ ऐसी बनी है कि हमें लगता है, कि हमारे जीतने के लिए किसी और का हारना जरूरी है या फिर उसे मिल गया तो मुझे नहीं मिलेगा... जिसे SCRACITY MENTALITY कहते हैं..
हमें ये MENTALITY दिमाग से निकालकर ऐसा सोचना चाहिए कि हर इंसान के लिए बहुत कुछ है यहाँ.... जो कि ABUNDANCE MENTALITY होती है.
So अब से कोई भी situation में कोई भी deal करते वक्त एक WIN-WIN Situation करने की ही कोशिश करो. जिससे सबका फायदा हो!


HABIT 5. SEEK FIRST TO BE UNDERSTAND THEN TO BE UNDERSTOOD 

समझिए कि एक दिन आप एक चश्मे वाले के पास जाते हैं. और बताते हैं कि आपको दो दिन से बराबर दिख नही रहा है! ये सुनकर दुकानदार अपना पहना हुआ चश्मा निकालकर आपको दे देता है और बोलता है लो इसे Try करो..ये मेरे लिए काफी सालों से अच्छे से काम कर रहा है. so आप वो चश्मा पहनते हो और वो और भी खराब दिखने लगता है.
अब ऐसा होने के बाद कितने चांसेस है कि आप वापिस उस चश्मे वाले के पास कभी जायेंगे... शायद ही कभी!

लेकिन actually में हम सब भी उस चश्मे वाले की तरह ही हैं, जब हम लोगों से बात करते हैं तो उनके प्रोब्लम को को अच्छे से समझने से पहले ही उन्हें सोल्यूशन देना या लदना स्टार्ट कर देते हैं. हम  येEasily बोल देते हैं कि कोई हमारी feelings नहीं समझता पर खुद भी कभी सामने वाली की फीलिंग्स नहीं समझते ...सोचते भी हैं कि इस बात को कि सामने वाले ने क्या कहा और वो ऐसा कैसे कह सकता है जबकि main question ये होना चाहिए कि उसने ऐसा क्यों कहा? और उसकी फीलिंग्स क्या थी ये बोलते हुए .. so Next time जब आप किसी से बात करें तो उनकी बात बस reply देने की उद्देश्य से न सुने बल्कि उन्हें समझने की कोशिश करें. और सबसे महत्वपूर्ण तब फील होने दें कि आप सचमुच समझते हैं उनकी फीलिंग्स को!
जब आप ऐसा genuinely लोग आपको भी समझना स्टार्ट कर देंगे. 


HABIT 6. SYNERGY 
अगर आप दो प्लांट को साथ में लगाते हो तो उनकी जड़ साथ में मिलकर मिटटी की quality बढाती है. जिससे दोनों प्लांट को ग्रोथ बेटर होती है उन दो प्लांट की तुलना में जो कि अलग-अलग जगह पर लगाए गए हों...
SYNERGY  की हैबिट हमें हमेशा एक साथ as a Team  मिलकर काम करने के लिए इनकरेज करती है...
Example-  दो आदमी एक पेड़ से सेब तोड़ने की कोशिश कर रहे थे पर काफी कोशिश करने  के बाद भी दोनों उस तक पहुँच नहीं पा रहे थे क्योंकि सेब थोड़े ऊपर थे फिर दोनों ने सोचकर Decide किया कि एक आदमी दूसरे के कंधे पर चढ़कर सारे सेब तोड़ लेगा और उन्होंने सारे सेब तोड़ लिए..
इस उदहारण की तरह जब हम लोगों के साथ सिनार्जईस करते हैं तब हम अपनी Capability को जितना चाहे उतना बढ़ा सकते हैं. जिससे हमें हमारे गोल्स को पूरा करने में काफी आसानी हो जायेगी.


HABIT 7. SHARPEN THE SAW
एक आदमी बहुत देर से एक पेड़ को काटने की कोशिश कर रहा था वो एकदम थक चूका था और उससे पेड़ कट ही नहीं रहा था .. पास के ही एक लकडहारे ने यह देखा तो वह उसके पास गया और उसे सलाह दी कि उसे पहली अपनी आरी तेज कर लेना चाहिए.. ये बात सुनकर उस आदमी ने उससे कहा पर ये करने में तो बहुत टाइम जायेगा!

अभी यह जवाब शायद आपको स्टूपिड लगे पर हम भी usually ऐसा ही करते हैं 

हम Exercise के लीयते दिन के तीस मिनट नहीं निकाल सकते ताकि हमारी हेल्थ अच्छी रहे.
15 मिनट कोई बुक नहीं पढ़ सकते ताकि हमारी Knowledge बढे.
और तब हम कम्प्लेंन भी करते हैं कि हमारी जिंदगी  अच्छी क्यों नहीं है ?
Habit नम्बर 7 खुद को हमेशा बेहतर बनाने पर फोकस करती है.
अपने टाइम का सबसे अच्छा use हमें खुद को इस चार एरिया में बेहतर बनाने के लिए करना चाहिए.
1. PHYSICAL
2. MENTAL
3. SOCIAL
4. SPIRITUAL.

ये HABIT बाकि छः हैबिट को सराउंड करती है और हमें उन सबको फोलो करना पोसिबल कराती है .हमारी सबसे कीमती एसीट को बेहतर बनाकर जो कि हम खुद हैं. 



ये सभी बातें हमने एक किताब The 7 Habits of Highly Effective People
से पढ़ी है जिसके लेखक R. Stephen Covey  हैं.. 

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